गुरुवार, 12 नवंबर 2020
विश्व की प्रमुख जनजातियाँ Major Tribals of the world
बुधवार, 11 नवंबर 2020
"होलोग्राफी" एक विशेष त्रिविमीय फोटोग्राफी
होलोग्राफी
महिला स्वतंत्रता सेनानी नारायणी देवी वर्मा (NARAYANI DEVI VARMA)
महिला स्वतंत्रता सेनानी नारायणी देवी वर्मा
▶ नारायणी देवी का जन्म मध्य प्रदेश के सिंगोली गांव् में रामसहाय भटनागर के यहाँ हुआ।
▶बारह वर्ष की अल्पायु में ही उनका विवाह माणिक्यलाल वर्मा के साथ कर दिया गया ।
▶किसानों व आम जनता पर राजा जागीरदारों के अत्याचार देखकर माणिक्यलाल वर्मा ने आजीवन किसानों, दलितों व गरीबों को सेवा का संकल्प लिया तो नारायणी देवी इस व्रत में उनकी सहयोगिनी बनी।
▶माणिक्यलाल वर्मा के जेल जाने पर परिवार के पालन- पोषण के साथ ही नारायणी देवी ने घर-मोहल्लों में जाकर लोगों को पढ़ाना एवं शोषण के खिलाफ महिलाओं को तैयार करने के कार्य किये।
▶नारायणी देवी अपनी सहयोगिनियों के साथ घर-घर जागृति संदेश पहुँचाती और लोगों को बेगार, नशा प्रथा एवं बाल-विवाह के विरुद्ध आवाज उठाने एवं संगठित होकर कार्य करने की प्रेरणा देती।उन्होंने डूंगरपुर रियासत में खड़लाई में भीलों के मध्य शिक्षा प्रसार द्वारा जागृति पैदा करने का कार्य भी किया।
▶1939 ई. में प्रजामण्डल के कार्यों में भाग लेने के कारण उन्हें जेल जाना पड़ा। 1942 ई. में भारत छोड़ो आन्दोलन में भाग लेने के कारण नारायणी देवी को पुनः जेल जाना पड़ा।
▶1944 ई. में वे भीलवाड़ा आ गई और यहाँ 14 नवम्बर, 1944 को महिला आश्रम संस्था की स्थापना की। यहाँ प्रौढ़ शिक्षा व प्रसूति गृह का संचालन भी किया।
▶ वे 1970 से 1976 ई. तक राज्यसभा की सदस्य रहीं।
▶12 मार्च, 1977 को उनकी मृत्यु हुई।
अलवर प्रजामण्डल आन्दोलन (ALWAR PRAJAMANDAL AANDOLAN)
अलवर प्रजामण्डल आन्दोलन
▶1933 ई. में अलवर में कांग्रेस समिति की स्थापना हुई | इसी कांग्रेस समिति का नाम 1938 ई. में हरिनारायण शर्मा और कुंज बिहारी लाल मोदी ने 'अलवर राज्य प्रजामण्डल' कर दिया।
▶1938 ई. में प्रजामण्डल ने स्कूलों में फीस वृद्धि का विरोध करते हुए उत्तरदायी शासन स्थापना की मांग की। फलतः हरिनारायण शर्मा सहित कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। मगर प्रजामण्डल कार्यकर्ताओं ने नुक्कड़ सभाओं द्वारा जनजागृति का कार्य जारी रखा।
▶अगस्त, 1940 में सरकार ने प्रजामण्डल का पंजीकरण कर लिया। पंजीकरण होते ही प्रजामण्डल ने राजगढ़, तिजारा, खैरथल, रामगढ़ आदि में अपनी शाखाएं स्थापित कर जन चेतना का कार्य शुरू कर दिया।
▶1942 ई. के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान प्रजामण्डल ने उत्तरदायी शासन स्थापना की मांग को लेकर आंदोलन चलाया तथा सभाओं एवं प्रदर्शनों के द्वारा राज्य की नीतियों एवं शासन व्यवस्था के विरुद्ध रोष प्रकट किया। सरकार ने प्रजामण्डल कार्यकर्ताओं को जेल में ठूंस कर आंदोलन को दबाने का प्रयास किया, मगर विफल रही।
▶1948 ई. तक उत्तरदायी शासन स्थापना की मांग को लेकर प्रजामण्डल और राज्य सरकार के मध्य गतिरोध बना रहा।
▶1 फरवरी, 1948 को भारत सरकार द्वारा अलवर राज्य का शासन अपने हाथ में लेने के साथ ही प्रजामण्डल को माँग समाप्त हो गई।
▶18 मार्च, 1948 को अलवर 'मत्स्य संघ का हिस्सा बन गया।
राजस्थान के भूमिज शैली के मंदिर (Bhumij Shaili Temple of Rajasthan)
राजस्थान के भूमिज शैली के मंदिर
▶ इस शैली की विशेषता मुख्यतः उसके शिखर में परिलक्षित है। इस शिखर के चारों और प्रमुख दिशाओं में तो लतिन या एकान्डक शिखर की भाँति, ऊपर से नीचे तक चैत्यमुख डिजायन वाले जाल की लतायें या पट्टियाँ रहती हैं लेकिन इसके बीच में चारों कोणों में, नीचे से ऊपर तक क्रमशः घटते आकार वाले छोटे-छोटे शिखरों की लड़ियाँ भरी रहती हैं।
▶ राजस्थान में भूमिज शैली का सबसे पुराना मंदिर पाली जिले में सेवाड़ी का जैन मंदिर (लगभग 1010-20 ई.) है।
▶ इसके बाद मैनाल का महानालेश्वर मंदिर ( 1075 ई.) है, जो पंचरथ व पंचभूम है। यह मंदिर पूर्णतः अखंडित है व अपने श्रेष्ठ अनुपातों के लिए दर्शनीय है।
▶ रामगढ़ (बारां) का भण्ड देवरा व बिजौलिया का उंडेश्वर मंदिर (लगभग 1125 ई.) दोनों गोल व सप्तरथ हैं। रामगढ़ मंदिर सप्तभूम है जबकि उंडेश्वर नवभूम है। रामगढ़ मंदिर अपनी पीठ की सजावट, मण्डप व स्तम्भों की भव्यता व मूर्तिशिल्य के लिए दर्शनीय है।
▶ झालरापाटन का सूर्य मंदिर सप्तरथ व सप्तभूम है लेकिन उसकी लताओं में अनेकाण्डक शिखरों की भांति उरहश्रृंग जोड़ दिये गए हैं।
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| सूर्य मंदिर झालरापाटन |
▶ रणकपुर का सूर्य मंदिर व चित्तौड़ का अद्भुत नाथ मंदिर भी भूमिज शैली के हैं।
मंगलवार, 10 नवंबर 2020
विश्व के प्रमुख देशो के राष्ट्रीय प्रतीक National symbols of major countries of the world
विश्व के प्रमुख देशो के राष्ट्रीय प्रतीक National symbols of major countries of the world
विश्व के प्रमुख देशो के राष्ट्रीय प्रतीक
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क्रम संख्या |
देश |
प्रतीक |
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1 |
भारत |
अशोक चक्र |
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2 |
फ्रांस |
लिली |
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3 |
बेल्जियम |
शेर |
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4 |
डेनमार्क |
बीच |
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5 |
चिली |
कंडोर एवं ह्युमुल |
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6 |
कनाडा |
मैपल पक्षी |
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7 |
यूनाइटेड किंगडम |
सफ़ेद लिली |
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8 |
ईरान |
गुलाब का फूल |
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9 |
आस्ट्रेलिया |
वैटल |
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10 |
बांगलादेश |
कँवल(वाटर लिली) |
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11 |
स्पेन |
जिम्बाबे पक्षी |
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12 |
रूस |
शेर |
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13 |
सीरिया |
चाँद तारा |
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14 |
तुर्की |
शेर |
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15 |
नीदरलैंड |
फर्न ,कीवी |
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16 |
नार्वे |
शेर |
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17 |
पाकिस्तान |
चमेली का फूल |
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18 |
सूडान |
ईगल |
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19 |
आयरलैंड |
हार्प |
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20 |
लेबनान |
सीडर पक्षी |
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21 |
इटली |
सफ़ेद लिली |
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22 |
जर्मनी |
ईगल |
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23 |
मगोलिया |
ईगल |
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24 |
इजरायल |
कैंडलाबुम |
क्रांतिकारी ज्वाला प्रसाद जिज्ञासु(Krantikari Jwala Prasad Jigyashu)
क्रांतिकारी ज्वाला प्रसाद जिज्ञासु
▶ज्वाला प्रसाद जिज्ञासु ने धौलपुर में 'आर्य समाज' के माध्यम से समाज सुधार एवं राष्ट्रीय चेतना पैदा करने का कार्य किया।
▶1934 ई. में जौहरी लाल इन्दु के साथ मिलकर इन्होंने 'नागरी प्रचारिणी सभा' की स्थापना की। इन्होंने हरिजन सेवा का कार्य भी किया तथा सरकारी व सार्वजनिक विद्यालयों में हरिजन बालकों के पढ़ने पर रुकावट को दूर करवाया।
▶ 1938 ई. में ज्वाला प्रसाद और जौहरी लाल इन्दु ने मिलकर धौलपुर प्रजामण्डल' की स्थापना की। प्रजामण्डल का उद्देश्य उत्तरदायी शासन की स्थापना करना था। राज्य के दमन के फलस्वरूप ज्वाला प्रसाद ने आगरा से आंदोलन का संचालन किया।
▶1942 ई. के 'भारत छोड़ो' आन्दोलन के दौरान धौलपुर में कांग्रेस की स्थापना की गयी। 'तरवीभरा' गाँव में कांग्रेस की एक सभा में राज्याधिकारियों ने गोली चला दी जिसके फलस्वरूप 'ठाकुर छत्रसिंह' एवं 'पंचमसिंह' घटना स्थल पर ही शहीद हो गए। जिज्ञासु की राजनीतिक गतिविधियों के कारण राज्य सरकार ने इनके परिवार को तंग किया। फिर भी ज्वाला प्रसाद धौलपुर की जनता के लिए संघर्ष करते रहे।






