• कठपुतली चित्र

    राजस्थानी कठपुतली नृत्य कला प्रदर्शन

शुक्रवार, 13 नवंबर 2020

पालनहार योजना - राजस्थान सरकार की जनकल्याणकारी योजना (Palanbhar Yojana)

पालनहार योजना - राजस्थान  सरकार की  जनकल्याणकारी योजना 

यह योजना राजस्थान सरकार द्वारा राज्य के 0 से 18 वर्ष तक के विशेष देखभाल एवं संरक्षण वाले बालक/ बालिकाओं की विभिन्न श्रेणियों के लिये है। इसके तहत् आने वाले बालक/बालिकाओं की देखनाल एवं पालन-पोषण की व्यवस्था परिवार के अन्दर किसी निकटम रिश्तेदार/परिचित व्यक्ति के द्वारा किया जाता है। बालक/बालिकाओं के देखभाल करने वाले को पालनहार कहा गया है। बालक/बालिकाओं के आर्थिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक विकास को सुनिश्चित करने के लिये सरकार द्वारा मासिक आर्थिक सहायता दी जाती है।

पात्र बालक/बालिका की श्रेणी

●  अनाथ बच्चे

●  मृत्यु  दण्ड/ आजीवन कारावास प्राप्त प्राप्त माता/पिता के बच्चे

●  निराश्रित पेंशन की पात्र विधवा माता के तीन बच्चे

●  पुनर्विवाहित विधवा माता के बच्चे

●  एच.आई.वी./एड्स पीडित माता/पिता के बच्चे

●  कुष्ठ रोग से पीडित माता/पिता के बच्चे

●  नाता जाने वाली माता के तीन बच्चे

●  विशेष योग्यजन माता/पिता के बच्चे

●  तलाकशुदा/परित्यक्ता महिला के बच्चे

श्रेणीवार आवश्यक दस्तावेज

●  माता-पिता के मृत्यु प्रमाण-पत्र की प्रति  - (अनाथ बच्चे )

●  दण्डादेश की प्रति -(मृत्यु  दण्ड/ आजीवन कारावास प्राप्त प्राप्त माता/पिता के बच्चे)

●  विधवा पेशन गुगतान आदेश (पी.पी.ओ.) की प्रति -(निराश्रित पेंशन की पात्र विधवा माता के तीन बच्चे)

●  पुनर्विवाह के प्रमाण पत्र की प्रति -(पुनर्विवाहित विधवा माता के बच्चे)

●  ए.आर.टी. सेन्टर द्वारा जारी ए.आर.डी. डायरी/ग्रीन कार्ड की प्रति -(एच.आई.वी./एड्स पीडित माता/पिता के बच्चे)

●  सक्षम बोर्ड द्वारा जारी किये गये चिकित्सा प्रमाण पत्र की प्रति -(कुष्ठ रोग से पीडित माता/पिता के बच्चे)

●  नाता गये हुए एक वर्ष से अधिक समय होने का प्रमाण -(नाता जाने वाली माता के तीन बच्चे)

●  40 प्रतिशत या अधिक निःशक्तता के प्रमाण पत्र की प्रति -(विशेष योग्यजन माता/पिता के बच्चे)

●  तलाकशुदा/परित्यक्ता पेंशन भुगतान आदेश (पी.पी.ओ.) की प्रति-(तलाकशुदा/परित्यक्ता महिला के बच्चे)

पालनहार द्वारा जमा करवाये जाने वाले अन्य आवश्यक दस्तावेज

●  पालनहार का "भामाशाह कार्ड/जनआधार कार्ड "

●  पालनहार का "आय प्रमाण पत्र" (विधवा/ परित्यक्ता/तलाकशुदा एवं बी.पी.एल. श्रेणी में आय प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य नहीं है)

●  "मूल निवास प्रमाण पत्र" की प्रति

●  बच्चे का "आधार कार्ड"

●  बच्चे का "आंगनवाडी केन्द्र पर पंजीकरण/विद्यालय में अध्यनरत् होने का प्रमाण पत्र

●  अनाथ बच्चों का पालन-पोषण करने का प्रमाण पत्र" (जिनके माता-पिता की नृत्यु हो गई हो अथवा न्यायिक प्रक्रिया द्वारा मृत्युदण्ड/ आजीवन कारावास से दण्डित किए गए हो अथवा जिनकी विधवा माता ने विधिवत पुनर्विवाह के पश्चात अपनी संतानों को त्याग दिया हो, के लिये ही उक्त प्रमाण पत्र की पूर्ति कराई जानी है)

अनुदान राशि 

●  0-6 वर्ष तक - 500 रुपये प्रतिमाह (0-3 वर्ष तक के बालक/बालिका का आगनबाड़ी केन्द्र में पंजीकरण/शाला पूर्व शिक्षा हेतु | विद्यालय में जाने का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य नहीं है तथा 3-8 वर्ष तक के बालक/बालिका का आंगनबाड़ी केन्द्र में पंजीकरण/शाला पूर्व शिक्षा हेतु विद्यालय में जाने का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है)

●  8-18 वर्ष तक - 1000 रुपये प्रतिमाह (बालक/बालिका का विद्यालय/व्यवसायिक शिक्षा हेतु किसी संस्थान में जाने का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य| 2000 रुपये वार्षिक अतिरिक्त एकमुश्त देय (विधवा पालनहार व नाता पालनहार में देय नहीं)

पात्रता

 पालनहार का वार्षिक आय रू. 1.20 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए

 एवं बच्चे कम से कम 3 वर्ष से राजस्थान राज्य में निवासरत हो

आवेदन प्रक्रिया

●  ई-मित्र कियोस्क केन्द्र पर संपर्क करें

संपर्क सूत्र :-

●   संबंधित जिला कार्यालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में संपर्क करें 
●   अधिक जानकारी हेतु निदेशालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, जयपुर (राज)/फोन नम्बर 0141-2226604/वेबसाईट  www.sje.rajasthan.gov.in

आवश्यक निर्देश :-

●  बच्चे का "आंगनवाडी केन्द्र पर पंजीकरण / विद्यालय में अध्यनरत् होने का प्रमाण पत्र" प्रति वर्ष माह जुलाई में ई-मित्र कियोस्क के माध्यम से अद्यतन (Update) करवाना अनिवार्य होगा अन्यथा पालनहार योजनान्तर्गत देय राशि का भुगतान माह जुलाई से रोक दिया जायेगा।

●  पालनहार का भामाशाह कार्ड अनिवार्य दस्तावेज के रूप में शामिल किया गया है अत: पालनहार को भामाशाह कार्ड प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। (पालनहार का मोबाईल नम्बर भामाशाह कार्ड में दर्ज नहीं होने/मोबाईल नम्बर होने/नोबाईल नम्बर बदले जाने की स्थिति अथवा पालनहार की किसी भी प्रकार का व्यक्तिगत सूचना जैसे पालनहार का नाम, जन्म तिथि, बैंक खाता संख्या आदि में अद्यतन (Update) करवाने की स्थिति में उक्त सूचना नागाशाह कार्ड में अद्यतन (Update) करवाना अनिवार्य होगा)

●  बच्चे का आधार कार्ड अनिवार्य दस्तावेज के रूप में शामिल किया गया है। अतः पालनहार को बच्चे का आधार कार्ड प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा तथा बच्चे का बायोमेट्रीक अथवा ओ.टी.पी. (One Time Password) के माध्यम से सत्यापन करवाना होगा (बच्चे का आधार कार्ड में मोबाईल नम्बर दर्ज नहीं होने/मोबाईल नम्बर बंद/मोबाईल नम्बर बदले जाने की स्थिति अथवा बच्चे का किसी भी प्रकार का व्यक्तिगत सूचना जैसे बच्चे का नाम, जना तिथि आदि में अद्यतन (Update) करयाने की स्थिति में उक्त सूचना आधार कार्ड में अद्यतन (Update) करवाना अनिवार्य होगा)
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गुरुवार, 12 नवंबर 2020

विश्व की प्रमुख जनजातियाँ Major Tribals of the world

विश्व की प्रमुख जनजातियाँ Major Tribals of the world


सेमांग (Semang) -यह मलेशिया के पर्वतीय भागों में सेमांग जनजाति पायी जाती है |
 
बुशमैन (Bushman) - कालाहारी मरुस्थल में निवास करने वाली जनजाति जो हब्शी प्रजाति 

ऐशती (Ashanti)-घाना के एंशाती पठार पर रहने वाली जनजातियाँ।

एस्किमो (Eskimo)-कनाडा के उत्तरी भाग व ग्रीनलैण्ड के क्षेत्र में रहने वाली जनजाति जो मंगोलॉयड प्रजाति की हैं।

बंटू (Bantu)-नीग्रीटो जनजातियों का परिवार सदृश्य जो अफ्रीका के भूमध्य रेखीय भागों में रहते हैं। किक्यू. जुल, गानी, गांडा आदि जनजातियाँ हैं।

अचुआ (Achua)-बेल्जियम कांगो के पिग्मी लोग।

एनू (Ainu) -जापान के (काकेशायड) मूल निवासी।

बरयाट्स (Buryats)-मध्य एशिया में रहने वाली जनजाति।

बिन्दुबू (Bindubu)-पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया की जनजाति।

बददू (Benduins)-अरब के उत्तरी भाग (हमद एवं नफूद) मरुस्थल में एवं निर्जन प्रदेशों में कबीले के रूप में चलवासी जीवन व्यतीत करने वाले बदू नीग्रिटो जाति के है।

बाटवा (Batwa)-अफ्रीका के कसाई प्रदेश में रहने वाले पिग्मी लोग। ये छोटे कद के होते हैं।

एबोरिजिन्स (Aborigin)-ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासी, जो ऑस्ट्रेलिया के आन्तरिक भागों में रहती हैं।

दयाक (Dayak)- बोर्नियों में रहने वाला एक वर्ग

फेलाह (Fellah)-मिस्र (नील नदी घाटी) का एक खेतिहर मजदूर।

फूला (Fula) -अफ्रीकी नीग्रो तथा भूमध्य सागरीय काकेशायड मिश्रित सूडानी लोग।

फुलैनी (Fulaini)-उत्तरी नाइजीरिया व आस-पास के लोग।

हांका (Hakka)-पीत नदी के मैदानी भाग के लोग हाका जनजाति के हैं।

हो (Hoh)-संयुक्त राज्य अमेरिका के ओलंपिक प्रायद्वीप में रहने वाले इंडियन लोग हैं।

होटेन्टॉट (Hottentot)-दक्षिणी अफ्रीका के वे लोग जो बुशमैन और बंटू लोगों से काफी मिलते जुलते है

इन्का (Inca)-दक्षिणी अमेरिका के पीरू देश की कुलको घाटी की चवान जाति।

किक्यू (Kikuyu)-कीनिया के कृषक जनजाति जो नीग्रो जाति के हैं|

कुबु (Kubu)-सुमात्रा की जनजाति।

खिरगीज (Khirghiz)-मध्य एशिया के किर्गिजस्तान गणराज्य में पामीर उच्च भूमि और ध्यान शान पर्वतमाला के क्षेत्र में अधिवासित।

मसाई (Masai)-केन्या में पायी जाने वाली घुमक्कड़ी एवं पशुचारक के रूप में जीवन निर्वाह करते हैं। ये बड़ी संख्या में गाय पालते है।

कुर्द (Kurd)-ईरान, इराक, अमीनिया तथा अजरबैजान में बड़े पठारी क्षेत्रों में रहने वाली एक पशुपालक कृषक।

लैप्स (Lapps)-दक्षिण स्कैन्डिनेविया, उत्तरी रूस के कोला प्रायद्वीप की जनजाति जो मत्स्य-संग्रहण, रेंडियर पालन तथा शिकार से अपना जीवन-यापन करती है।

माओरी (Maoni)-न्यूजीलैण्ड के मूल निवासी।

युगात (Yuit)- साइबेरिया तथा अलास्का के सेंटलारेंस द्वीप के एस्कीमो लोग।

रेड इंडियन-उत्तरी अमेरिका के मूल निवासी जो आकार में मंगोलायड प्रजाति से सम्बन्धित लगते हैं। यह नाम कोलम्बस (यूरोपीय) द्वारा दिया गया।
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बुधवार, 11 नवंबर 2020

"होलोग्राफी" एक विशेष त्रिविमीय फोटोग्राफी

होलोग्राफी

● साधारण फोटोग्राफी से किसी वस्तु का केवल द्विविमीय चित्र प्राप्त होता है और इसके लिए सामान्य प्रकाश का ही उपयोग किया जाता है। परंतु, लेजर प्रकाश के उपयोग से एक विशेष प्रकार की त्रिविमीय फोटोग्राफी, अर्थात होलोग्राफी संभव हो सकी है।

● सन् 1969 में एमेट लीय और ज्यूरीस उपानिक्स ने लेजर तकनीक की सहायता से त्रिआयामी होलोग्राफिक चित्र बनाया। 

● इसके लिए दो अलग-अलग शक्ति की लेजर किरणों का इस्तेमाल किया गया था। उल्लेखनीय है कि, इससे बना चित्र अधिक सटीक था और उसकी नकती प्रतिकृति बनाना लगभग असंभव था।

● होलोग्राफी एक त्रिआयामी चित्र को भण्डारित और प्रदर्शित करने की एक विधि है। यह त्रिआयामी चित्र सामान्यतः एक फोटोग्राफिक प्लेट या किसी अन्य प्रकाश संवेदी पदार्थ पर बनाया जाता है। 

● अनावरित प्लेट को होलोग्राम कहा जाता है। कुछ क्रेडिट कार्डों में घोखाघड़ी रोकने के लिए होलो ग्राम का प्रयोग होता है। 

● विज्ञान दृश्य पटलों, कलाकृतियों और आभूषणों में भी होलोग्राम दिखायी देते हैं। होलोग्राम का प्रयोग टायरों, लैंसों, हवाई जहाज के पंखों एवं अन्य उत्पादों में भ्रंशों की पहचान के लिए भी किया जाता है।
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महिला स्वतंत्रता सेनानी नारायणी देवी वर्मा (NARAYANI DEVI VARMA)

महिला स्वतंत्रता सेनानी नारायणी देवी वर्मा 

▶ नारायणी देवी का जन्म मध्य प्रदेश के सिंगोली गांव् में रामसहाय भटनागर के यहाँ हुआ। 

▶बारह वर्ष की अल्पायु में ही उनका विवाह  माणिक्यलाल वर्मा के साथ कर दिया गया ।

▶किसानों व आम जनता पर राजा जागीरदारों के अत्याचार देखकर माणिक्यलाल वर्मा ने आजीवन किसानों, दलितों व गरीबों को सेवा का संकल्प लिया तो नारायणी देवी इस व्रत में उनकी सहयोगिनी बनी। 

▶माणिक्यलाल वर्मा के जेल जाने पर परिवार के पालन- पोषण के साथ ही नारायणी देवी ने घर-मोहल्लों में जाकर लोगों को पढ़ाना एवं शोषण के खिलाफ महिलाओं को तैयार करने के कार्य किये।

▶नारायणी देवी अपनी सहयोगिनियों के साथ घर-घर जागृति संदेश पहुँचाती और लोगों को बेगार, नशा प्रथा एवं बाल-विवाह के विरुद्ध आवाज उठाने एवं संगठित होकर कार्य करने की प्रेरणा देती।उन्होंने डूंगरपुर रियासत में खड़लाई में भीलों के मध्य शिक्षा प्रसार द्वारा जागृति पैदा करने का कार्य भी किया। 

▶1939 ई. में प्रजामण्डल के कार्यों में भाग लेने के कारण उन्हें जेल जाना पड़ा। 1942 ई. में भारत छोड़ो आन्दोलन में भाग लेने के कारण नारायणी देवी को पुनः जेल जाना पड़ा। 

▶1944 ई. में वे भीलवाड़ा आ गई और यहाँ 14 नवम्बर, 1944 को महिला आश्रम संस्था की स्थापना की। यहाँ प्रौढ़ शिक्षा व प्रसूति गृह का संचालन भी किया। 

▶ वे 1970 से 1976 ई. तक राज्यसभा की सदस्य रहीं। 

12 मार्च, 1977 को उनकी मृत्यु हुई।

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अलवर प्रजामण्डल आन्दोलन (ALWAR PRAJAMANDAL AANDOLAN)

अलवर प्रजामण्डल आन्दोलन 

▶1933 ई. में अलवर में कांग्रेस समिति की स्थापना हुई  | इसी कांग्रेस समिति का नाम 1938 ई. में हरिनारायण शर्मा और कुंज बिहारी लाल मोदी ने 'अलवर राज्य प्रजामण्डल' कर दिया। 

▶1938 ई. में प्रजामण्डल ने स्कूलों में फीस वृद्धि का विरोध करते हुए उत्तरदायी शासन स्थापना की मांग की। फलतः हरिनारायण शर्मा सहित कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। मगर प्रजामण्डल कार्यकर्ताओं ने नुक्कड़ सभाओं द्वारा जनजागृति का कार्य जारी रखा। 

▶अगस्त, 1940 में सरकार ने प्रजामण्डल का पंजीकरण कर लिया। पंजीकरण होते ही प्रजामण्डल ने राजगढ़, तिजारा, खैरथल, रामगढ़ आदि में अपनी शाखाएं स्थापित कर जन चेतना का कार्य शुरू कर दिया।

▶1942 ई. के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान प्रजामण्डल ने उत्तरदायी शासन स्थापना की मांग को लेकर आंदोलन चलाया तथा सभाओं एवं प्रदर्शनों के द्वारा राज्य की नीतियों एवं शासन व्यवस्था के विरुद्ध रोष प्रकट किया। सरकार ने प्रजामण्डल कार्यकर्ताओं को जेल में ठूंस कर आंदोलन को दबाने का प्रयास किया, मगर विफल रही। 

▶1948 ई. तक उत्तरदायी शासन स्थापना की मांग को लेकर प्रजामण्डल और राज्य सरकार के मध्य गतिरोध बना रहा। 

▶1 फरवरी, 1948 को भारत सरकार द्वारा अलवर राज्य का शासन अपने हाथ में लेने के साथ ही प्रजामण्डल को माँग समाप्त हो गई। 

▶18 मार्च, 1948 को अलवर 'मत्स्य संघ का हिस्सा बन गया।

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राजस्थान के भूमिज शैली के मंदिर (Bhumij Shaili Temple of Rajasthan)

राजस्थान के भूमिज शैली के मंदिर 

▶ भूमिज शैली मंदिर निर्माण की नागर शैली की उपशैली है। 

▶ इस शैली की विशेषता मुख्यतः उसके शिखर में परिलक्षित है। इस शिखर के चारों और प्रमुख दिशाओं में तो लतिन या एकान्डक शिखर की भाँति, ऊपर से नीचे तक चैत्यमुख डिजायन वाले जाल की लतायें या पट्टियाँ रहती हैं लेकिन इसके बीच में चारों कोणों में, नीचे से ऊपर तक क्रमशः घटते आकार वाले छोटे-छोटे शिखरों की लड़ियाँ भरी रहती हैं। 


▶ राजस्थान में भूमिज शैली का सबसे पुराना मंदिर पाली जिले में सेवाड़ी का जैन मंदिर (लगभग 1010-20 ई.) है।

▶ इसके बाद मैनाल का महानालेश्वर मंदिर ( 1075 ई.) है, जो पंचरथ व पंचभूम है। यह मंदिर पूर्णतः अखंडित है व अपने श्रेष्ठ अनुपातों के लिए दर्शनीय है। 

▶ रामगढ़ (बारां) का भण्ड देवरा व बिजौलिया का उंडेश्वर मंदिर (लगभग 1125 ई.) दोनों गोल व सप्तरथ हैं। रामगढ़ मंदिर सप्तभूम है जबकि उंडेश्वर नवभूम है। रामगढ़ मंदिर अपनी पीठ की सजावट, मण्डप व स्तम्भों की भव्यता व मूर्तिशिल्य के लिए दर्शनीय है। 

▶ झालरापाटन का सूर्य मंदिर सप्तरथ व सप्तभूम है लेकिन उसकी लताओं में अनेकाण्डक शिखरों की भांति उरहश्रृंग जोड़ दिये गए हैं। 

सूर्य मंदिर झालरापाटन

▶  रणकपुर का सूर्य मंदिर व चित्तौड़ का अद्भुत नाथ मंदिर भी भूमिज शैली के हैं।


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मंगलवार, 10 नवंबर 2020

विश्व के प्रमुख देशो के राष्ट्रीय प्रतीक National symbols of major countries of the world

 विश्व के प्रमुख देशो के राष्ट्रीय प्रतीक National symbols of major countries of the world

 विश्व के प्रमुख देशो के राष्ट्रीय प्रतीक

क्रम संख्या

देश

प्रतीक

1

भारत

अशोक चक्र

2

फ्रांस

लिली

3

बेल्जियम

शेर

4

डेनमार्क

बीच

5

चिली

कंडोर एवं ह्युमुल

6

कनाडा

मैपल पक्षी

7

यूनाइटेड किंगडम

सफ़ेद लिली

8

ईरान

गुलाब का फूल

9

आस्ट्रेलिया

वैटल

10

बांगलादेश

कँवल(वाटर लिली)

11

स्पेन

जिम्बाबे पक्षी

12

रूस

शेर

13

सीरिया

चाँद तारा

14

तुर्की

शेर

15

नीदरलैंड

फर्न ,कीवी

16

नार्वे

शेर

17

पाकिस्तान

चमेली का फूल

18

सूडान

ईगल

19

आयरलैंड

हार्प

20

लेबनान

सीडर पक्षी

21

इटली

सफ़ेद लिली

22

जर्मनी

ईगल

23

मगोलिया

ईगल

24

इजरायल

कैंडलाबुम

 


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